Activities

International Mother Tongue Day Celebrated

अंतर्राष्ट्रीय मातृभाषा दिवस

२१फरवरी – २०१९

. साक्षी प्रिया ; रौल न०.

शीर्षक : ‘सओन मास’

भाषा : मैथिली

कवि : नागार्जुन

सार : इस कविता में कवि ने सावन ऋतु में होनेवाली उन सभी परिस्थितियों का वर्णन किया है, जो साधारण रूप से मिथिला प्रान्त में देखने को मिलती है. कवि ने नदी में जलजमाव , बाँस के बगीचे में जुगनुओं की टिमटिमाहट और मेघ राज के क्रोध का वर्णन करते हुए सओन मास अर्थात सावन ऋतु को नमन अर्पण किया है.

. साईमा फिरदौस ; रौल न०.४०

शीर्षक : ‘मंजिल तलाश कर’

भाषा : उर्दू

कवि : मुहम्मद इकबाल

सार : इस कविता में कवि ने हमें व्यक्तिगत स्तर पर गंतव्य की ओर बढ़ने को कहा है तथा आगे बढ़ते हुए स्वयं को तलाश करने को कहा है. कवि इस कविता के माध्यम से हमारी आकांशा को हासिल करने तथा उस आकांक्षा को महत्वकांक्षा में परिवर्तित करने को कहा है.

. सोनाली प्रभा ; रौल न०.९५

शीर्षक : ‘अपन हृदय के आकाश बनाऊँ’

भाषा : मैथिली

कवि : पंकज झा

सार : इस कविता के माध्यम से कवि पंकज झा कहते है की हमें दूसरों के प्रति कटुता और मतभेद की भावना न रखते हुए स्नेह, प्रेम और सम्मान की भावना रखनी चाहिए.

. सिमरन कुमारी ; रौल न०.१०

शीर्षक : ‘अयलय भाषा के आँधीं’

भाषा : मगही

कवि : रवि शंकर

सार : इस कविता के माध्यम से कवि ने हिंदी भाषा की बोली मगही के गिरते अस्तित्व की व्याख्या की है. उन्होंने अपनी कविता के माध्यम से मगही भाषा के उपयोग एवं इसके महत्त्व पर प्रकाश डाला है. साथ ही साथ , वर्त्तमान स्थिति में इसके पतन पर चिंता व्यक्त की है.

. प्रज्ञा रतन श्रीवास्तव ; रौल न०.

शीर्षक : ‘मुखौटा’ (स्वरचित)

भाषा : हिंदी

सार : हम अपनी रोज़मर्रा की जिंदगी में कई ऐसे अनुभवों से गुजरते है, जहाँ लोगों के अनेक रूप हमारे सामने आते हैं. अपने असली चेहरे को छिपाते हुए लोग एक मुखौटा लगाकर चलते हैं. हमें एक ही इन्सान के कई रंग देखने को मिलते है. यह कविता इसी विषय पर आधारित है.

. अनु प्रिया ; रौल न०.७९

शीर्षक : ‘बसंत शोभा’

भाषा : मैथिली

कवि : विद्यापति

सार : महाकवि विद्यापति की कविता ‘बसंत शोभा’ वसंत ऋतु के सौन्दर्य की छटा बिखेरती हैं. साथ ही नव वृन्दावन के राज विहार का बखान करती है. इस कविता के माध्यम से कवि वसंतोत्सव के मनोरम दृश्य का गुणगान क्र रहे है.

. साक्षी भसीन ; रौल न०.३९

शीर्षक : ‘हाँ हूँ मैं एक लड़की’ (स्वरचित)

भाषा : पंजाबी

सार : इस कविता में एक लड़की के अस्तित्व एवं उसकी महत्वाकांक्षाओं पर प्रकाश डाला गया है. एक लड़की अपन आजीवन दुसरो को समर्पित कर देती है. स्वयं एक वस्तुमान अस्तित्व लेकर समाज में जीती है. वो अपनों पहचान खोजती है. अपने लिए न जीकर भी वो प्रसन्न है क्योंकि वो एक लड़की है.

. फ़र्नांडिस मेलिसा ; रौल न०.५८

शीर्षक : ‘त्या दिसा वदाकदे’

भाषा : कोंकणी

कवि : बाकीबाब बोरकार

सार : इस कविता क माध्यम से कवि ने गोवा द्वारा लड़ी गयी स्वतंत्रता संग्राम का वर्णन किया है. जिसके उपरांत गोवा गोवा पुर्तगाल शासन से मुक्त हो गया था.

. सानिया श्री ; रौल न०.५९

शीर्षक : ‘एही एही वीर रे’

भाषा : संस्कृत

कवि :

सार : इस कविता में कवि ने सैनिकों के देशप्रेम को दर्शाया है. कवि कहते है की ऐ वीर तुम ही देश की रक्षा करते हो. अपनी जान की परवाह किये बिना तुम शत्रु का नाश करते हो.

१०. शबनम कुमारी ; रौल न०.

शीर्षक : ‘समय’

भाषा : अंगिका

कवियित्री : माधवी चौधरी

सार : इस कविता में मुख्यतः समय के महत्व की बत की गयी है. जिसमे समय के विभिन्न उपयोग का अर्थ बताया गया है. कविता में कहा गया है की समय सबके लिए बराबर होता है. इस कविता के माध्यम से कवियित्री समय के उचित उपयोग से फल प्राप्ति का वर्णन किया है.

११. श्वेता कुमारी ; रौल न०.७३

शीर्षक : ‘कर्म बिना जीवनं कठम’

भाषा : संस्कृत

कवि : सत्यनारायण पाण्डेय

सार : इस कविता में कर्म की महत्ता दिखाई गयी है. कविता में कहा गया है कि कर्म के बिना जीवन व्यतीत करना व्यर्थ है. कर्म से ही भाग्य का निर्माण होता है. दुष्कर्म हमेशा दुःख देता है इसलिए इसको त्यागना चाहिए.

१२. फौजिया हसन ; रौल न०.३५

शीर्षक : ‘बाजीचाअतफाल है दुनिया मेरे आगे’

भाषा : उर्दू

कवि : मिर्ज़ा ग़ालिब

सार : प्रस्तुत ग़ज़ल मिर्ज़ा ग़ालिब द्वारा रचित १४ दोहों का संयोग है. इस ग़ज़ल का उद्देश्य भविष्य तथा किस्मत के गर्त में छिपा सत्य है समय के माध्यम से प्रकट किया गया है. इस ग़ज़ल में ग़ालिब साहब ने अपनी लेखनी द्वारा समय, मनुष्य , एवं सर्व शक्तिमान ईश्वर की व्याख्या की है.

१३. अनु प्रिया ; रौल न०.१८

शीर्षक : ‘कृष्ण की चेतावनी’

भाषा : हिंदी

कवि : रामधारी सिंह ‘दिनकर’

सार : प्रस्तुत कविता में कृष्ण के विराट रूप को दर्शाया गया है. इस कविता में श्री कृष्ण महाभारत के युद्ध में दुर्योधन को संधि करने के लिए समझा रहे है.

१४. निशा कुमारी : रौल न०.४८

शीर्षक : ‘घिसल पीटल भाषा के काहे लागी सीखी थ’

भाषा : मगही

कवि : चितरंजन चैनपुरा

सार : प्रस्तुत कविता एक कटाक्ष है जो वर्तमान परिपेक्ष में मगही भाषी लोगों पर किया गया है. इस कविता के माध्यम से कवि ने अपनी मातृभाषा मगही के प्रति विलगाव की भावना को प्रस्तुत किया है. इस कविता का उद्देश्य यह है की पुरातन भाषाओं को आज की आधुनिक पीढ़ी महत्त्व नहीं दे रही है. जिसके कारण पुराणी भाषाओं का महत्त्व गिरता जा रहा है.

१५. भावना कुमारी ; रौल न०.१०२

शीर्षक : ‘माँ’

भाषा : बांग्ला

कवियित्री : पोंचशिखा

सार : इस कविता में एक बच्चे के जीवन में माँ की उपस्थिति का वर्णन किया गया है. कवियित्री कहती है की बच्चा जन्म के बाद से माँ की गोद में ही संसार को जानता है. उसकी तुतलाहट और अशुद्धियाँ भी माँ को प्रिय लगती है और माँ केवल उसे प्यार से सहेजती है.

१६. स्नेहलता कुमारी ; रौल न०.७४

शीर्षक : ‘मधुशाला’

भाषा : हिंदी

कवि : हरिवंश राय ‘बच्चन’

सार : हरिवंश राय ‘बच्चन’ ने अपनी काव्यसंग्रह मधुशाला में मदिरालय को महत्वपूर्ण स्थान दिया हैं. उनके अनुसार मदिरालय ही एक ऐसी जगह है जहाँ जाति , धर्म , अमीर , गरीब, हर प्रकार के लोग बिना किसी भेदभाव के आते है. मदिरालय द्वारा सभी लोगों को स्वीकारने के इस प्रारूप को बच्चन जी ने बड़े ही सहजता के साथ प्रस्तुत किया है.

१७. पूजा कुमारी ; रौल न०.८८

शीर्षक : ‘आपन के पेहचान’ (स्वरचित)

भाषा : भोजपुरी

सार : इस कविता के माध्यम से बताया गया है की इन्सान अपने जीवन के कई क्षेत्र में अपने मुख पर मुखौटा लगाये जीता है. अपने असली पहचान को छिपाकर झूठी पहचान प्रस्तुत करता है. अतः हमें अपनी मूल पहचान को स्वीकार क्र जीना चाहिए.

१८. कुमकुम कुमारी ; रौल न०.४१

शीर्षक : ‘कामायनी : स्वप्न सर्ग’

भाषा : हिंदी

कवि : जयशंकर प्रसाद

सार : इस कविता में कवि जयशंकर प्रसाद ने मानव सृष्टि के अग्रज मनुऔर कामपुत्री कामायनी श्रद्धा‘  के अनुरागी मिलन के स्वप्न को दर्शाया है.